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भारत के महान योद्धा सन्यासी स्वामी विवेकानन्द के विचार और आदर्श को आत्मसात कर व्यक्ति निर्माण से राष्ट निर्माण के महायज्ञ में सेवारत विवेकानन्द केन्द्र जो कि एक आध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन है। विवेकानन्द केन्द्र के संस्थापक माननीय एकनाथ रानाडे जी ने विवेकानन्द केन्द्र की कोर एक्टिविटी में योग को प्रमुखता से रखा। केन्द्र द्वारा योग के विभिन्न आवासीय एवं अनावासीय शिविर, वर्ग व  सत्र आयोजित किए जाते है। इसी क्रम में केन्द्र द्वारा अखिल भारतीय योग शास्त्र संगमम् का आयोजन किया। तीन दिवस तक चले इस योग के महायज्ञ में देश के 15 प्रांतों से व पुर्तगाल देश से योगसाधक,योगविद् सहभागी रहे। संगमम में 123 पुरूष व 83 बहनों सहित कुल 206 योगसाधक, योगविद् औरयोग विधा के छात्र-छात्राएं सहभागी रहे। योग संगमम का शुभारंभ दिनांक 06 जनवरी को देश के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य डॉ. महादेवन जी के मुख्यातिथ्य में हुआ। समारोह की अध्यक्षता विवेकानन्द केन्द्र के उपाध्यक्ष माननीय श्री बालकृष्णन जी ने की। विधिवत उद्घाटन के पश्चात् तीन दिवस में कुल 10 तकनीकी सत्र हुए जिनमें 48 पेपर प्रस्तुत किए गए। योग संगगम् में योग विद्या से जुडी अग्रणी 10 संस्थाओं की सहभागिता रही। सभी तकनीकी सत्रों में वरिष्ठ योग विद् आदरणीय डॉ. श्रीराम अगासे, श्री विश्वास लपालकरजी, श्री रघुराम जी, श्री रघुनंदन जी, श्री भक्तिपुत्र जी, श्री पद्मनाभन जी, सुश्री राजिवी मेहता व श्री रवि शर्मा जी,आदि ने विषय विशेषज्ञ मॉडरेटर की भूमिका का निर्वहन किया।

योग साधकों की दिनचर्या की शुरूआत समुद्र की लहरों पर अरूणोंदय की लालिमा के साथ होती थी, तत्पश्चात् योग का अभ्यास कराया जाता था। आसनों के क्रम में बीकेएस अयंगर योग पद्धति से योगासन अभ्यास तथा विवेकानन्द केन्द्र पद्धति से प्राणायाम व ध्यान का अभ्यास कराया गया। दिनांक 06 दिसंबर की शाम रामायण दर्शनम् परिसर में विवेकानन्द केन्द्र विद्यालय के बालक-बालिकाओं द्वारा भरतनाट्यम व तमिल लोक सस्कृति के नृत्य नाटिका आदि की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, तत्पश्चात् सभी योगसाधकों ने रामायण दर्शनम तथा भारत माता सदनम् में जाकर रामायण की चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन कर आनंद लिया। दिनांक 07 जनवरी को मुख्यवक्ता के रूप में स्वामी विवेकानन्द योग अनुसंधान संस्थान, एसव्यासा के प्रो.चांसलर व प्रो.के. सुब्रमणियम् जी द्वारा सप्तभूमि विषय पर प्रेरक व्याख्यान दिया गया। वहीं दोपहर में सभी योग साधकों ने भारत के महान योद्धा सन्यासी स्वामी विवेकानन्द के राष्टीय स्मारक पर जाकर स्वामी विवेकानन्द की अद्भुत प्रतिमा के दर्शन किए और मां कन्याकुमारी देवी के पद्चिन्ह के दर्शन पश्चात् ध्यानमंण्डपम् में बैठकर ध्यान की दिव्य अनुभति ली। वहीं गौधूलि बेला में महाकवि कालिदास के नाम से बने खुले मंच पर योग के प्रदर्शन व बीकेएस अयंगर जी का पंतजलि योग सू़त्र पर भाष्य पर वरिष्ठ योग प्रशिक्षिका सुश्री राजीवि मेहता द्वारा प्रेरक व्याख्यान हुआ। उक्त सत्र में पी. शंकरन् जी द्वारा शीर्षासन का प्रर्दशन किया गया, उन्होने 1घण्टा 22 मिनिट शीर्षासन में रहकर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराकर विश्व कीर्तिमान बनाया है। वहीं योग साधक चन्द्राआचार्य द्वारा नौलि क्रिया का प्रदर्शन किया गया। 

दिनांक 08 जनवरी को मुख्यवक्ता के रूप में प्रख्यात योगविद् डॉ. श्रीराम अगासे जी द्वारा योग में शास्त्र का महत्व.विषय पर व्याख्यान दिया गया। वहीं उसके पूर्व दक्षिण भारत की युद्धकला कल्लरी पायटू का प्रशिक्षण देने वाली चार शिक्षण संस्थाओं द्वारा वैदिक काल की यु़द्धकला का साहसिक प्रदर्शन किया गया। दोपहर में विवेकानन्द केन्द्र प्राकृतिक संसाधन विकास प्रकल्प नारडेप के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वी.गणपति जी द्वारा सिद्धा मेडिसिन के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। 

केन्द्रीय राज्य मन्त्री, आयुष विभाग, भारत सरकार माननीय श्री श्रीपाद नाइक जी का प्रेरणादायी सानिध्य योग शास्त्र संगमम् के सभी योगसाधकों को दो दिवस सानिध्य मिला वह भी उल्लेखनीय है। वहीं केरल के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य डॉ. सेतु माधवन् जी सपरिवार रहे।समापन समारोह में मुख्यअतिथि के रूप में केन्द्रीय राज्य मन्त्री, आयुष विभाग, भारत सरकार माननीय श्री श्रीपाद नाइक जी व विशिष्ट अतिथि के रूप में आयुष के सीसीआरवायएस के निदेशक श्री रामास्वामी जी मंचस्थ रहे। वहीं समारोह की अध्यक्षता विवेकानन्द केन्द्र की राष्टीय उपाध्यक्ष माननीय सुश्री निवेदिता रघुनाथ भिडे ने की। समारोह में योग शास्त्र संगममम् की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। समापन समारोह में अतिथियों का परिचय श्री विश्वास लपालकर जी द्वारा दिया गया। वहीं योग शास्त्र संगमम का प्रतिवेदन श्री गिरीश कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। अंत में आभार डॉ.श्रीराम अगासे जी द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में वंदेमातरम् का गायन सुश्री प्रियंवदा दीदी व एकल गीत सुश्री कल्पना दीदी द्वारा प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संयोजन व संचालन श्रीमती तंगलक्ष्मी द्वारा किया गया।

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