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संस्कारवान एवं सशक्त नारी ही समर्थ समाज और  विकसित राष्ट्र का आधार हो सकती है। इसके लिए देश के प्राचीन गौरव और संस्कारों के प्रति निष्ठा एवं आधुनिक समाज व्यवस्था के साथ तालमेल सीखने की आवश्यकता है। भारतीय जीवन में स्त्री ही मूल्यों एवं परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने की महत्वपूर्ण कड़ी है किंतु फैशन की चकाचैंध में उसका यह नैसर्गिक गुण प्रकट नहीं हो पा रहा है। वर्तमान सिनेमा, टीवी धारावाहिकों एवं विज्ञापनों में स्त्री का जो स्वरूप प्रदर्शित किया जाता है वह धीरे-धीरे समाज का रोल मॉडल बनता जा रहा है और प्राचीन भारतीय रोल मॉडल जिनमें सीता, सावित्री, मैत्रेयी, गार्गी, रानी लक्ष्मी बाई और सिस्टर निवेदिता जैसे चरित्रों को विस्मृत होते जा रहे हैं जिसके कारण वर्तमान पीढ़ी संस्कारों से दूर हो रही है। वर्तमान में सोशल मीडिया जहां किशोरियों को अपने परिवार से अलग-थलग कर रहा वहीं इस एकाकीपन को दूर करने के लिए वह कुत्सित षड्यंत्रों का शिकार हो जाती हैं और ऐसे अपराधों की संख्या आज बढ़ती जा रही है। विवेकानंद केंद्र किशोरियों को न केवल आत्म सम्मान से जीने का मार्गदर्शन दे रहा है अपितु उन्हें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियों के बारे में अवगत कराते हुए उनके सर्वांगीण विकास का प्रशिक्षण किशोरी विकास शिविरों के माध्यम से देने का प्रयास कर रहा है। उक्त विचार विवेकानंद केंद्र की प्रांत संगठक प्रांजलि येरीकर द्वारा राजकीय बालिका विद्यालय आदर्श नगर में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की अजमेर शाखा द्वारा आयोजित किशोरी विकास शिविर के अवसर पर व्यक्त किए गए।

इस अवसर पर जानकारी देते हुए केंद्र की सहनगर प्रमुख बीना रानी ने बताया कि किशोरी विकास शिविर में उपस्थित छात्राओं को व्यक्तिगत हाइजीन, विधिक साक्षरता तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान की गई। इसके साथ ही खेल खेल में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। किशोरी विकास शिविर के अवसर पर ग्रामीण सामाजिक विकास संस्थान के निदेशक रूपेश शुक्ला, डॉ नेहा कोटिया, शेफाली शर्मा, याशिका यादव और शेफाली सांखला ने भी अपने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर प्राचार्या शांता भिरयानी ने भी मार्गदर्शन प्रदान किया।

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