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Yuva Vimarsh Indore 2016

इंदौर महानगर में “जाग उठी है तरुणाई” विषय पर युवा विमर्श का आयोजन हुआ. विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की इंदौर शाखा द्वारा आनंद मोहन माथुर सभागृह, इंदौर प्रेस क्लब में हुआ।

‘युवा विमर्श ‘- एक वैचारिक श्रुंखला गत वर्ष केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे की जन्म शती पर्व भारतवर्ष में मनाई गई। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष मा. निवेदिता रघुनाथ भिड़े का उद्बोधन रहा। कार्यक्रम में मा. भंवर सिंह राजपूत विशेष अतिथि  के रूप में उपस्थित थे। युवा विमर्श कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मा. निवेदिता दीदी ने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित बाते बताई।

  •     प्रदीप्त युवा मन ही राष्ट्र की जीवन रेखा है ।
  •     युवा स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से झोक देता है ।
  •     युवा अतीत-भविष्य को जोड़ता है ।
  •     अतीत में ऐसा क्या जीवन रस है जिससे यह राष्ट्र हजारो वर्ष से जीवित है ।
  •     जो भी सपना जब तक पूरा नहीं होगा, तब तक रुकेंगे नहीं, यह सपना केवल युवाओ का ही हो सकता है ।
  •     परिस्थितियों से विचलित नहीं होना ही युवाओ का स्वभाव है ।
  •     परिस्थितियां कैसी भी हो, परन्तु बाह्य परिस्थितियों के शिकार नहीं हो ऐसा युवा जिस देश में है, उस राष्ट्र का कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता ।
  •     प्रत्येक युवा को अपना ध्येय निर्धारित करना ही होगा ।
  •     जीवन ध्येय ही आत्म शक्ति को जोड़ता है, जिससे युवा किसी भी परिस्थितियों में विचलित नहीं होता है ।
  •     स्वामी विवेकानंद कहते थे, संपूर्ण विश्व ही परस्पर जुड़ा हैl इसलिए समाज को ही सत्य के अनुसार चलना चाहिए ।
  •     संपूर्ण विश्व के अस्तित्व का सत्य एकात्मता ही है । हमारे देश के युवाओ को जापान के युवाओ के जीवन ध्येय  को स्मरण करते हुए कार्य करना होगा. जापान के पास कोई संसाधन नहीं था, सिवाय प्रदीप्त युवा मन के ।
  •     मैं अकेला क्या कर सकता हूँ, यह नहीं बोलना बल्कि स्वामी विवेकानंद की जीवनी को आत्मसात करना ।
  •     जीवन निर्माण में लगने वाली उर्जा व्यर्थ कार्यो में न लगे यह स्व विवेक से ही कार्यरत हो ।
  •     जीवन का आनंद राष्ट्र की संस्कृति की ही देन है ।
  •     जीवन के ध्येय के साथ जीवन के मूल्य को भी समझना होगा ।

आज स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है और परिवार से यह सहज संभव होता है, दूसरा स्वामीजी स्वयं युवा थे और उनकी अधिक अपेक्षा युवाओं से थी अतः युवा विमर्श एक वैचारिक शृंखला इस कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं ने जुड़कर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देना है। कार्यक्रम में मा. निवेदिता दीदी ने युवाओ के प्रश्नों का समाधान किया I २५० की संख्या में २० महाविद्यालय से युवा, प्राचार्य तथा प्राध्यापक वर्ग व नगर के प्रबुद्ध जन कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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