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विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, मध्य प्रांत द्वारा किशोरी विकास कार्यशाला का आयोजन दिनांक 4 अक्टूबर (रविवार) को किया गया l

सुश्री रेखा चूड़ासामा जी विद्या भारती की पूर्ण कालीन कार्यकर्ता एवं अखिल भारतीय बालिका शिक्षा  संयोजक  ने उद्घाटन सत्र में आपने किशोरी अवस्था में आए बदलाव के बारे में बहुत ही सरल तरीके से प्रस्तुति दी ।

किशोरियों में  कैसे शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक बदलाव आते है उसके बारे में सटीक चीजें बतलाई,  जिसे गहराई से अध्ययन कर, समझ कर हम किशोरियों को उचित मार्गदर्शन सरलता से दे पाएंगे l उन्होंने कहा नचर्या में असुंतलन होने से क्या प्रभाव होगा बताना अति अनिवार्य है । व्यवस्थित दिनचर्या व उसके असर के बारे में बताना आवश्यक है । सुबह कब जागना, उठना,भोजन लेना, पढ़ना,सोना,कैसे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो  स्वस्थ जीवनशैली दिनचर्या अपनाना के बारे में विस्तार से बताया गया l

दायित्व बोध कराया गया - घर,बहार,शाला,समाज में क्या क्या करना चाहिए। जैसे घर पर  मेहमान आए तो नमस्कार करना ,पानी देना, जल पान पकड़वाना आदि । परिवार में मां को घरेलू कार्यों में सहायता देना,पड़ोस में कोई मदद चाहिए तो आगे बढ सहायता देना,शाला में सह पाठियों  को विषय समझने में मदद करनी चाहिए।

व्यवहार कैसा होना चाहिए के बारे में जानकारी दीं - छोटों,बड़ों,,परिवार,रिश्तेदार,पड़ोसी आदि को कैसे सकारात्मक सोच के साथ सहयोग करे।

उन्होंने आगे बताया कि हमारे देश में पर्यावरण संकट है तो पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता आवश्यक है ।  घर में अगर नल खुला है तो बंद करना, पंखा लाइट अनावश्यक चालू है तो बंद कर बिजली बचाना, परंपरा,पूजा,पाठ,संस्कृति को समझना, एवं अन्यों को भी सिखाना । महिलाए पुरुष के अपेक्षा ज्यादा सुसंस्कृत* होती है अतः अच्छी किशोरी अच्छी महिला अच्छी  नागरिक बनेगी l

स्वावलंबन के गुणों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा -  स्वदेशी चीजें खरीदे व उपयोग करे,आत्म निर्भर बनना,अपने कपड़े स्वयं धोना,तय करना,नाश्ता बनवाना, परोसना, स्वयं काम करना आना चाहिए।

मातृ भाषा में बात करना चाहिए l शब्दों को सोच कर सजा कर उपयोग करें l मीठा बोलें,आत्म निर्भर भारत बनाने में अपना सक्रिय योगदान दे।

उन्होंने बताया भोजन बनाने में, आहार, पाक शास्त्र की वैज्ञानिकता को समझना चाहिए , पाक शाला के गुण,भोजन बनाने की कला, चावल कूकर & भगोने दोनों में बनाना,भोजन और आहार का ज्ञान देने के बारे में जानकारी दीं ।

मेरा घर कैसे सुंदर बने, घर व्यवस्थित, स्वच्छ,सजा कर रखें ताकि घर व समान के प्रति आत्यमियता बढ़े।

स्वास्थ्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा -  किशोर अवस्था में आहार पर्याप्त मात्रा में लें एवं अपने स्वस्थ का बोध कर पौष्टिक आहार लेना, परिश्रम करना आवश्यक है । झाड़ू पोछा करना ताकि कमर पतली रहे, कपड़े धोना हांथ मजबूत होगे, स्वास्थ्य का बोध करवाना, चबा चबा कर खाना l पेट साफ रहे ये ध्यान दें l उन्होंने कहा इन सभी विषयों पर चर्चा करना चाहिए ।

उनके द्वारा सुझाव दिया गया कि व्यायाम नित्य करना, सीढ़ी से उतरे लिफ्ट का उपयोग कम करे, बाज़ार जाए तो कपड़े की थैली लेकर जाए प्लास्टिक का उपयोग ना करें l

अपने परिवार के इतिहास का गौरव का जिक्र फक्र से करना l उन्होंने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि मेरी दादी चूल्हे में कई लोगो का भोजन बनाती थी, दादा जी साइकिल से दस किलमीटर जाती थीं, मेहनती थीं, ये सभी बातें बताना तो आत्मीयता बढ़ेगी।

मितव्ययता के सम्बन्ध में एक दृष्टान्त बताते हुए उन्होंने कहा - पहले चादर के रूपों में उपयोग करें फिर पोछे के कपड़े तक उपयोग करना, पूरा उपयोग करना  l Use and Throw से बचना एवं एक चीज को बार - बार उपयोग करना। स्टील के बर्तन का प्रयोग करें, डिस्पोजल का उपयोग यथासंभव कम करें ।

 किशोरी जब नारी बनेगी तो कबाड़ से जुगाड़ करना सीखेगी। शादी की पत्रिका से नए रुपांतरण से उपयोगी वस्तुएँ बनाना, राखी घर में बनाना, अभिनंदन कर्ड बनाना आदि हमें सीखना एवं करना चाहिए ।

उन्होंने इस करोना महामारी के समय, उपयोग, मितव्यती, के बारे में बताया । वैज्ञानिक रूप से बालिका पेट से ही सक्रिय,मजबूत होती है। नैसर्गिक है, धैर्य,सहनशीलता,आत्मविश्वास,समन्वय करने का गुण, समायोजन करना,मातृत्व ,कर्तव्य,नेतृत्व क्षमता का विकास आदि बचपन से करना चाहिए। किशोरी में मातृत्व के गुण रहते है ,श्रेष्ठ विकास, कर्तव्य व नेतृत्व का विकास करना चाहिए।  घर में दस लोग है एक बाथरूम है तो कैसे उपयोग करे अर्थात उन्होंने संतुलन बनाने के बारे में बताया । 

उनका कहना था कि हम अपने घरों में -  स्वयं,परिवार, घर,समाज, राष्ट्र के विकास के लिए छोटी - छोटी चीजें बताए । सामाजिक कार्य में भी नेतृत्व का महत्व बताए ।

उन्होंने कर्तव्य के बारे में बताते हुए कहा कि किशोरियों को हम विकास के आयाम, बोलने, समझने, अच्छा व्यवहार,आचरण,सब को लेकर चलना, कैसे अपने कर्तव्य से स्वयं,परिवार,समाज राष्ट्र हित के लिए कार्य करना है, इन सब के बारे में बताएं, जिससे संपूर्ण चहुंमुखी विकास हो सके।

उन्होंने बोला चर्चा सत्र होना चाहिए जिसमें सभी बोले,सुने,समझे कोई जिज्ञासा हो तो परामर्श ले। देश में किशोरियां ने हर क्षेत्र में संघर्षों का, चुनौतियों का सामना कर नाम कमाया,धैर्य ,साहस से आगे बढ़ी, अपने मेहनत से मुकाम हासिल किए l उनके उदहारण भी बताए ।

बालिका विकास में ध्यान दे l बालिका बालक की नकल करती है, उन्हें बताए ऐसा ना करें - वो ज्यादा शक्तिशाली,सहनशील है, सृजनशीलता है  ऐसे गुण जगाए विकसित करें । आज की किशोरी कल की मां है ये गौरव उत्पन्न करें।

उन्होंने चार प्रकार के संयम - अर्थ संयम, स्वाद संयम, इन्द्रिय संयम,समय संयम का महत्व विस्तृत में बताया । उन्होंने कहा - विभिन्न प्रतियोगिता रखे, गतिविधियाँ करना,शारीरिक फिटनेस के प्रति जागरूक करें, स्वयं, परिवार, समाज,राष्ट्र के हित की सोचे स्वयं और राष्ट्र को एक माने ऐसे विचार विकसित करें।

उक्त कार्यशाला में खेल एवं परिचर्चा द्वारा  53 बहनों की सहभागिता रही l

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