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जीरापुर। गुलामी की जंजीरों से जकड़े भारत के युवाओं को स्व संस्कृति के प्रति प्रेरित करने का कार्य विवेकानन्द जी ने किया..११सितम्बर १८६३ को अमेरिका के विश्व धर्म सम्मेलन में जाकर अपनी संस्कृति के वैभव को विश्व पटल पर प्रस्थापित किया। विजय के दिवस ने भारत के युवाओं  के मन में विश्वास जाग्रत किया। कलकत्ता के दिवान विश्वनाथ दत्त व भुवनेश्वरी के लाल ने अपनी जिग्यासा प्रवृति ने नरेन्द्र ने विवेकानन्द बना दिया। जिसने परतंत्रता व दासता की मानसिकता से भारतीय मानस को मुक्त कर दिया।

यह बात विवेकानन्द केन्द्र बीओआरएल चिकित्सालय के प्रशासनिक अधिकारी गिरीश कुमार पाल ने विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी नगर जीरापुर द्वारा आयोजित.   " विश्व बंधुत्व दिवस" के कार्यक्रम में कही । उन्होने अपने उद्बोदन में विवेकानन्द के विचारों की वर्तमान मे प्रासंगीकता पर विचार प्रस्तुत करते हुये कहां कि विवेकानन्द से प्रेरणा  लेकर हमें हमारी बात को दृड़तापूर्वक रखना होगा तभी हम अपनी धर्म संस्कृति को वैश्विक पहचान दिला सकते है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रामभुवनसिंह कुशवाह सह प्रांत संचालक, मध्य प्रांत व वरिष्ठ पत्रकार ने धर्म की व्याखा करते हुये कहा कि धर्म तो एक सनातन ही है...जिसका प्रवतक कोई नही है..अन्य पंथ है जिन्हे हम सम्प्रदाय कहते है ..सम्प्रदाय भी वह है जो सम रूप से प्रदाय करें....सम्प्रदाय के प्रवर्तक होते है...आजके समय में सम्प्रदाय के विस्तार की लड़ाई से विश्व संकट में आगया है ऐसे समय में सब में वही ईश्वर विद्यमान है ईस एकत्व के भाव का जागरण विवेकानन्द के विचार कर सकते है..ईन विचारों से  ही विश्व बंधुत्व दिवस की सार्थकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्ता कर रहे भाजपा मण्डल अध्यक्ष बंकट माहेश्वरी ने विवेकानन्द केन्द्र. के कार्यों की सराहना करते हुये नगर में बहिन कार्यकर्ताओं को भी सक्रियता से राष्ट्र कार्य करने की आवश्यकत्ता पर बल दिया ।  कार्यक्रम का प्रारम्भ ओमकार प्रार्थना शान्ति मंत्र से नगर संयोजक कुशाल मण्डलोई ने किया । विवेकानन्द केन्द्र एवं वक्ताओं  का परिचय विभाग प्रवास प्रमुख संजयसिंह ने कराया । संचालन केन्द्रवर्ग प्रमुख अनिल पुष्पद ने किया। कार्यक्रम में नगर के सेवानिवृत शिक्षक, प्रबुद्ध जन , पत्रकार ,  युवा सहित ८५ लोग उपस्थित रहे।

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